तलाश तुम ने क्या चाहा, नहीं जानामेरी तलाश रात से दिन तकआज भी जारी हैढूंढती हूँ कुछ शायराना शब्दजो सबसे अलगसबसे जुदासिर्फ तुम्हारे लिए होजिनको लेकर तुम जानोउन सारे लम्हों की अंतहीन यात्रा कोजहाँ हर पेड़ , हर शाख, हर कलरव मेंओस की थिरकती बूंदों मेंबारिश की बूंदों मेंखाली गुनगुनाती सड़कों में...........मैंने सिर्फ तुमको पुकारा हैरश्मि प्रभा =======================================================तलाशतुम मुझे अच्छे लगे थेऔर,इस अभिव्यक्ति कोमैंकुछ हटकरनए शब्दों के साथप्रस्तुत करना चाहता थाइधर,मैं उलझा रहा शब्दमाला मेंउधरतुमने परम्पराओं के सांचेबहुत तलाशे थेहम दोनों में कोई तो भटका थाअपनी अपनी खोज मेंलेकिन कौन?शाहिद मिर्ज़ा शाहिदhttp://shahidmirza.blogspot.com/http://shama-e-adab.blogspot.com/ तलाश तुम ने क्या चाहा, नहीं जाना मेरी तलाश रात से दिन तक आज भी जारी है ढूंढती हूँ कुछ शायराना शब्द जो सबसे अलग सबसे जुदा सिर्फ तुम्हारे लिए हो ज... Read more » 11:00 AM