पुनरागमन स्याह रात रहती है अकेली,ढूंढती है अपना साया -पूरे चाँद को!सन्नाटा उसके कानों में बोलता है,अकेली रात सिसकती है ,चांदनी को तरसती है......पर अक्सर मैं ही मिल जाती हूँऔर उसके संग अनजानी दिशा में खो जाती हूँ........रश्मि प्रभा ====================================!! पुनरागमन !!==================================== वर्षों से दबा हुआ , एक जीवित , मृत व्यक्ति , उठ खड़ा हुआ, वह आज , कर रहा था , वर्षों से अपनी , चेतना का विकास । परिपक्व हो उठा , नहीं जरुरत उसको , किसी के मार्गदर्शन की , करके प्रण वह , जीवित व्यक्ति हो उठा है , पुनः जीवित , अबकी कर देगा तहस - नहस , उन लोगों को जिसने , जीते जी कर दिया , उसको मृत सदृश । --सत्यप्रकाश पाण्डेय http://akelakalam.blogspot.com/अकेला कलम . पुनरागमन स्याह रात रहती है अकेली, ढूंढती है अपना साया -पूरे चाँद को! सन्नाटा उसके कानों में बोलता है, अकेली रात सिसकती है , चांदनी को तरसती है...... ... Read more » 11:00 AM