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पुनरागमन पुनरागमन

स्याह रात रहती है अकेली, ढूंढती है अपना साया -पूरे चाँद को! सन्नाटा उसके कानों में बोलता है, अकेली रात सिसकती है , चांदनी को तरसती है...... ...

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11:00 AM
 
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