मैं सोचती रही....
मैं सोचती रही शब्दों की विरासत मिली थी तुम्हें या आत्ममंथन ने की थी रचना शब्दों की जब भी तुम भावनाओं के दीप प्रज्जवलित कर...
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मैं सोचती रही....
मैं सोचती रही शब्दों की विरासत मिली थी तुम्हें या आत्ममंथन ने की थी रचना शब्दों की जब भी तुम भावनाओं के दीप प्रज्जवलित कर...
मां बताओ न .... ?
तुम तो माँ हो मैं ही नहीं पूरी प्रकृति तुम्हारे आँचल में है माँ इस आँचल से कुछ भाव मुझे भी दो न मुझे भी बनना है - बिल्कुल तुम्हारी तरह .....