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मैं सोचती रही.... मैं सोचती रही....

मैं सोचती रही शब्‍दों की विरासत  मिली थी तुम्‍हें  या आत्‍ममंथन ने की थी रचना  शब्‍दों की  जब भी तुम भावनाओं के  दीप प्रज्‍जवलित कर...

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10:36 AM

पहचान पहचान

एक एक रचना में कर्ता की पहचान होती है जो ना कह पाए वह ज़ुबान होती है रश्मि प्रभा ====================================================...

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10:17 AM

नया रंग नया रंग

प्यार से जो रंग खेले जाएँ वे हमेशा नए होते हैं ख़ुशी के रंग जो चेहरे पर आते हैं वे हर रंग से बेहतर होते हैं ... रश्मि प्रभा =====...

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11:00 AM

मां बताओ न .... ? मां बताओ न .... ?

तुम तो माँ हो मैं ही नहीं पूरी प्रकृति तुम्हारे आँचल में है माँ इस आँचल से कुछ भाव मुझे भी दो न मुझे भी बनना है - बिल्कुल तुम्हारी तरह .....

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11:00 AM
 
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