आओ रिश्तों की उम्र बड़ी छोटी हैकोई एक पल के लिएकोई दो पल के लिएवक़्त खो जाये उससे पहलेआओ एक अपना घर बना लें हम भी !..... कितने सालों दिन महीनों सेहरी पगडंडियों के पाँव भी मचलते हैंसितारे आसमां से लटके हैंहवाएँ खिलखिलाके चलती हैंजाने कब आखिरी मौसम आएआओ एक अपना घर बना लें हम भी रश्मि प्रभा ==================================================================आओ"चलो मिलके इन टुकड़ों में,सांझी बुनियाद ढूंढे,खुले आकाश के नीचे पुराने रिश्तों कीवो हर एक याद ढूंढे गलतियां-कमीयां आम हो गयीं आओ, कुछ ख़ास ढूंढे सूखे पत्तों की तरहक्यूँ बिखर जाएं?शाख़ से तोड़ दें नाता तो किधर जाएं?जो टूटने लगी हैवो आस ढूंढे एक-एक घर उठा के,स्नेह की सिलाई पे,बुन लेते हैं एक नया पहनावामाफ़ी और भलाई सेनयी शुरुआत के लिये एक नया लिबास ढूंढे फर्क ही नहीं होता हममें गरतो लज्ज़त कहाँ से आती?सरगम कैसे सजती,ये रंगत कहाँ से आती?चलो, इन्ही फ़र्कों में कहीं,एक से एहसास ढूंढे एक दुसरे की ज़रूरतों कोसमझने की ज़रुरत हैजो लाते है वापस, उन रास्तों पे चलने की ज़रुरत है आओ हम हंसी-ख़ुशी की पोटलियाँ अपने आस-पास ढूंढे" अंजना दयाल http://vrinittogether.blogspot.com/ आओ रिश्तों की उम्र बड़ी छोटी है कोई एक पल के लिए कोई दो पल के लिए वक़्त खो जाये उससे पहले आओ एक अपना घर बना लें हम भी ! ..... कितने सालों ... Read more » 11:00 AM