ख़ामोशी कुछ शब्द मेरी आत्मा से तुम ले लो कुछ मैं उठाती हूँ तुम्हारे अंतस की गहराइयों से प्रश्नों का हल निकालने की कोशिश मिलकर करते हैं .... रश्मि प्रभा ================================================================== तुम्हारे और मेरे प्रेम के बीच पसरी ख़ामोशी की स्पष्ट अभिव्यक्ति हमारी आँखों में उभरकर अब इक प्रश्न सी नज़र आने लगी है ; ख़ामोशी को शब्दों का इक नया आयाम देने और उसके अहसासों को एक नया रूप देने की कोशिश में हम दोनों ही क्यों कुछ और खामोश हो जाया करते हैं; क्यों नहीं शब्दों से अपना तारतम्य बनाये रखकर अपनी ख्ह्वाहिशें एक दुसरे से बाँट पाते हैं ; उन्हें सतरंगी खुशियों में बदल पाते हैं; क्यों ध्रुव तारे की सी चमक हमारे कोरों पर ठहरे अश्कों में नज़र आने लगी है; चाहत के आसमान में जो अपनी नियति सदा ही अवश्यम्भावी बनाये रखती है; प्रेम में येकैसी अनिश्चितता है; बिखर गयी है जो हम दोनों के बीच अनायास ही; और खड़ी है नागफनी के अपने विराट रूप में ; चुनौती देते हुए हमें; हमारे विशवास और समझ को ; कि..भरोसा है अगर तो बढ़ो आगे; पार करो मुझको और जीत लो अपने उस प्रेम को जो इस धरती पर युगों युगों से जीवित और स्थापित है अपनी सम्पूर्ण गरिमा के साथ; आओ और वो उत्तर जो कैद है हमारी ही खामोशियों के दायरे में ; उन्हें अब हम ही मुक्त और स्वीकार करें सम्मान सहित मेरे हम्न्फ्ज़ ....!!! अर्चना राज !! http://kahkashan-e-zazbaat.blogspot.in/ ख़ामोशी कुछ शब्द मेरी आत्मा से तुम ले लो कुछ मैं उठाती हूँ तुम्हारे अंतस की गहराइयों से प्रश्नों का हल निकालने की कोशिश मिलकर करते हैं ... Read more » 10:55 AM