कौन जीता है किसी और की खातिर | सबको अपनी ही बात पर रोना आया | बूढी आँखों में न जाने किसका इंतजार हैं खुद को सँभालने की एक नाकाम कोशिश गालों तक लुढकते हुए आंसूं दिल में दर्द को झुपाने की लाख कोशिश आवाज़ को बनाये रखने का झूठा प्रयास पर उम्र तो सब कुछ ब्यान कर देता है विश्वाश ही है जो अभी भी जिन्दा है दर्द एसा की एक टीस की तरह ... कब सैलाब बनकर सुनामी का रूप ले ले | कौन झुकना चाहता है ? सब अपने मद मैं चूर सबका अपना - अपना अहम् कौन किसके साथ है ? सबका अपना -अपना कारवां अपनी अपनी मंजिले ... पर ये जर्र - जर्र शरीर कहाँ ये सब जानता है ? बूढ़े कन्धों को तो सहारे की चाह किसी की हमदर्दी की आस अब भी है , की काश वो लौट आये वो छुहन , वो स्पर्श...
मीनाक्षी पन्त
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चलो न एक आँगन धूप में
नीम का पेड़ लगायें
वहीँ से निर्भीक रिश्तों की
एक शुरुआत करें ..............
रश्मि प्रभा
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रिश्तों के नाम
बहुत अरसा तो नहीं हुआ उस बात को
जब घर आने पर ताई चाची का
भाई होता था हम सभी का मामा
और बहिन होती थी
पूरे खानदान की ही नही
पूरे मोहल्ले और गाँव की मौसी,
कहाँ सिमट कर रह गए सारे रिश्ते?
तुम्हारी नज़र में मैं रह गई सिर्फ एक नारी देह
दुनिया बदल गयी, पर मुझे
आज भी प्रतीक्षा है उस दिन की
जब लौट आएगी रिश्तों की वो ही खूबसूरती
गंवार हूँ ?
पर मुझे आज भी छू जाते
है वो पल जब 'वो' ला कर माथे पर
ओढा देते थे माँ के, ओढ़नी
'गाँव की बहिन बेटी' के रिश्ते से
भीतर तक भीग जाती थी माँ
चाहती हूँ मैं भी जीना वो ही पल ...
पर अब, डरा देता है मुझे भीतर तक
अखबार के कोने में छपा एक छोटा - सा समाचार
'नन्ही बच्ची से बलात्कार'
और छिपा लेना चाहती हूँ
उसे ही नहीं
दुनिया की सारी बेटियों को
अपने में ,
पूछती हूँ खुद से
बदलाव के नाम पर क्या
यही माँगा था हमने?
डरी सहमी बेटियाँ भी पूछती है हमसे
कैसे खेल लेती थी माँ
तुम या नानी
रात देर तक कभी अकेले
कभी अपनी सब सखियों सहेलियों बच्चों के साथ
नीम के तले ?
इंदु पुरी गोस्वामी
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झूठ से घिन है .किसी का अहित हो रहा हो किसी सच से,तो चुप रहती हूँ..जरूरत पड़े तो धडल्ले से झूठ भी बोल लेती हूँ.सत्यवादी हरिश्चन्द्र भी नही हूँ,पर झूठ तभी जब सच खतरनाक बन जाए किसी के लिए. शोर्ट टेम्पर,तेज तर्रार,बोल्ड हूँ. हूँ तो हूँ,ऐसी ही हूँ. जेंट्स बिना परमिशन के सामने बैठते हुए घबराते हैं,खूब मजा लेती हूँ मन ही मन. यूँ ...कैसी हूँ क्यों बताऊँ ? जो मुझे जानते हैं उन्हें कुछ बताने की जरूरत नही पड़ती जो मुझे नही जानते उन्हें बताना जरुरी भी नही .... बस ...खुद ही नही जान पाई अब तक अपने आपको तो दूसरों को क्या बताऊं? किसी की भी मौत पर एक बूँद आंसू नही आता वहीं गीत,गजल सुनकर ही कभी,या कभी कोई प्यार से माथे पर हाथ फैर दे ये आंसू रोके नही रुकते ....... हाँ! सबसे खूब प्यार करती हूँ बस यही आता है.