माँ छिः ... धिक्कार है वंश इसे कहते हैं जो शान की झूठी तस्वीर के लिए माँ से परहेज करे माँ को पत्थर बना दे ... रश्मि प्रभा =============================================================माँ कितनी अच्छी हो तुम, माँ ! कह सकता हूँ तुमसेमन की सारी बातें,यह कि मेरे दोस्त आएँतो अंदर ही रहना,सामने आओ भीतो अच्छी साड़ी पहन बाल संवारकर आनाऔर दूरवाली कुर्सी पर बैठना. उनकी नमस्ते का उत्तरहाथ जोड़कर देना,हो सके तो चुप ही रहना,बोलना ही हो तोज़रा ध्यान रखना,शर्म को सर्म,ग़ज़ल को गजल मत कहना. उनके सामने चाय न पीना,सुड़कने कि आवाज़ आएगी. मेरी इतनी सी बात मानोगी न,मेरी अच्छी,प्यारी, माँ ? ओंकार http://onkarkedia.blogspot.in/ माँ छिः ... धिक्कार है वंश इसे कहते हैं जो शान की झूठी तस्वीर के लिए माँ से परहेज करे माँ को पत्थर बना दे ... रश्मि प्रभा ===============... Read more » 12:57 PM
वेदना सहना , सहते जाना जुर्म है वजह है घाव के गहरे होने का दोष अपना सिर्फ अपना है .... रश्मि प्रभा ======================================================वेदना खेल-खेल में राहगीरतोड़ लेते हैं टहनियां,मसल डालते हैं पत्ते,बच्चे फेंक जाते हैं मुझपर पत्थर यूँ ही... आवारा पक्षी जब चाहेंबैठ जाते हैं शाखों पर या बना लेते हैं उनमें घोंसले बिना पूछे... बारिशें भिगो जाती हैं,झिंझोड़ जाती हैं कभी भी,हवाएं कभी हौले तो कभी जोर से लगा जाती हैं चपत ठिठोली में... पतझड़ को नहीं सुहाती मेरी हरियाली, मेरी मस्ती,कर जाता है मुझे नंगा बेवजह जाते-जाते... आखिर मेरा कसूर क्या है?क्या बस यही कि मैं सब कुछचुपचाप सहता हूँ? ओंकार http://onkarkedia.blogspot.com/ वेदना सहना , सहते जाना जुर्म है वजह है घाव के गहरे होने का दोष अपना सिर्फ अपना है .... रश्मि प्रभा ================================... Read more » 11:00 AM