चौराहा पीछे देखो तो साया नज़र आता है उनके सवालों से परे मन कई सवाल करता है और खुद में हारा थका नींद के लिए बेचैन होता है ... रश्मि प्रभा ==================================================================चौराहा ज़िन्दगी के इस मोड़ पर जब पीछे मुड़कर देखता हूँ ,दिखाई देते हैंचौराहे,कितने मोड़ जिन्हें मैंने लिया नहीं,कितने बढे हुए हाथजिनको थामा नहीं,या फिसल गए मेरी पकड़ से. लेकिन किसने रोका मुझेउन मोड़ों पर बढ़ने से,उन हाथों को थामने से.किसे दोष दूं इस सबका ?मेरा कायरपन,कर्मफल,परिस्थितियाँ,संयोगया प्रारब्ध.या यह प्रयास है मेराअपनी गलतियों का ठीकरादूसरों के सर फोड़ने का. अब भी आते हैंसपने में वे छोड़े हुए मोड़,वे बढे हुए हाथ,और उठाते हैं इतने सवाल जिनका ज़वाब देने का समय फिसल गया हैमेरे हाथों से. अब तो मुझे हर चौराहे परकोई रास्ता चुनने मेंलगता है बहुत डर,शायदयह मोड़ भी गलत न हो. कैलाश सी शर्मा http://sharmakailashc.blogspot.com/ चौराहा पीछे देखो तो साया नज़र आता है उनके सवालों से परे मन कई सवाल करता है और खुद में हारा थका नींद के लिए बेचैन होता है ... रश्मि प्रभा ===... Read more » 10:24 AM