अधिक तृष्णा नहीं करनी चाहिए
संतोष में सुख है वरना दुःख है ......... सारे ब्लोग्गर्स अपने घर के बच्चों को बिठाएं और दादी माँ की कहानियों की गूढ़ता में जीवन का एक अर्थ...
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