हे नारी, तुम सच कहना
अत्याचार का विरोध करते करते क़ानूनी सुविधाएँ लेते लेते तुम इतनी वाचाल इतनी हठी इतनी उग्र हो गई कि अब पुरुष हताश है , उसे अपने पौरुषत्व क...
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हे नारी, तुम सच कहना
अत्याचार का विरोध करते करते क़ानूनी सुविधाएँ लेते लेते तुम इतनी वाचाल इतनी हठी इतनी उग्र हो गई कि अब पुरुष हताश है , उसे अपने पौरुषत्व क...