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ऐसा सावन पहले कभी नहीं आया... ऐसा सावन पहले कभी नहीं आया...

(राजा  रवि वर्मा की पेंटिंग मोहिनी झूला झूलते हुए ) सुबह-सुबह दरवाजे पर दस्तक हुई. उनींदी आखों से दरवाजा खोला तो ...

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10:49 AM

छूटना... छूटना...

किस मंजिल तक पहुंचना है सब तो छूट जाना है .... तेजी से छूटते रास्ते हँसते हैं रास्तों के संग मैं भी हँस लेती हूँ ..... र...

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11:26 AM

न, अब मुस्कुराते नहीं बनता.../ सितारे डुबकियां ले रहे थे समंदर के भीतर न, अब मुस्कुराते नहीं बनता.../ सितारे डुबकियां ले रहे थे समंदर के भीतर

मुझे नहीं पता मुझे क्या चाहिए मोम की तरह कतरा कतरा मेरे भीतर कुछ पिघलता है क्रोध बेमानी नहीं ... कोई हल नहीं ... चीख गले में तैरती है और ...

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12:47 PM
 
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