ये यादें यादें गिरे हुए पर्दों को हटाती हैं और गुजरे कल को सिरहाने रख जाती हैं .... रश्मि प्रभा =================================================== ये यादें मेरे जीवन की यादें!!! प्रायः अर्धरात्रि में उठती हैं, तो पीड़ा आकुल हो प्रभंजन की भाति.... ... नैनो में प्रवेश कर जाती है. जब समस्त जग निद्रा में लीन होता है मैं यादो के आलिंगन में बंदी बनी रहती हूँ, जैसे "तुम" अपरिचित हुए, ये यादें क्यों ना हुई अपरिचित? अपने साथ पीड़ा की आयु भी बढ़ा रही है, ये यादें!!! कितनी धृष्ट हैं...ये यादें सम्बंधित तुमसे हैं और, परिचय मुझसे बढाती हैं.... इनको पोषण में, आँखों का लवण..और जीवन का प्रत्येक क्षण भोजन रूप में देती हूँ क्या करूँ...जैसे तुम्हारा आना असंभव है, वेसे ही इन यादों का जाना भी.... अब धरा भी भोर से भीग रही है, यादें अब भी मेरे साथ लेटी, मुस्काते हुए बीती विभावरी की लाश निहार रही है.....प्रतीक्षा है उसे संभवता एक और विभावरी की... उफ़!! कितनी अविनीत है ये यादें.. मेरे जीवन की यादें सोनिया बहुखंडी गौर http://soniyabgaur.blogspot.in/ ये यादें यादें गिरे हुए पर्दों को हटाती हैं और गुजरे कल को सिरहाने रख जाती हैं .... रश्मि प्रभा ====... Read more » 10:16 AM