"संतुलन"
एक जीवन से दूसरा जीवन संतुलन बनाने के लिए बहुत कुछ इधर उधर होता है ठीक उसी तरह - जैसे किसी के आने पर कमरे की साज सज्जा बदलती है पर .... स...
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बचपन का ज़माना
बचपन ... सुनते कागज की नाव में सारी शैतानियाँ , नादानियां बैठ जाती हैं शरारतों के चप्पू छप छप पानी उछालते हैं सारी दुनिया मुट्ठी में परियां...