तूफ़ान में किनारा ढूंढना - आसान नहीं होता
तो कठिन भी नहीं होता !
पर भंवर में जब जीवन से लड़ाई होती है
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बड़ी लहरें तो अपने मद में होती हैं
नन्हीं लहरें बेख़ौफ़
भंवर के रास्तों को समतल बना जाती हैं
और - किनारा खुद बढ़ने लगता है ...
उस रोज़ तुमने अपनी परेशानियों में घिर के कह दिया ..
"मेरा ग्रह तुमलोगों को लग गया .."
तब से अनगिनत बार तुम्हारे ये शब्द
मेरे कानों में गूँज चुके हैं
और मुझे अन्दर तक झकझोर चुके हैं ..
ग्रह ?
तुमने तो ग्रहण से निकल कर हमें चमकाया है ...
फिर ये कैसे कहा तुमने ..
ग्रहों का काला साया जब घबराहट देता है ...
तो तुम्हारा नाम लेने भर से ही मन में रौशनी भर जाती है ...
फिर ये कैसे कहा तुमने ...
एक नहीं हज़ार ग्रहों से लड़ी हो तुम ..
अपने रक्षा मन्त्र के कवच से
हमेशा हमें बाँध कर रखा है तुमने ..
फिर ये कैसे कहा तुमने ...
ग्रहों ने कई खेल खेले तुम्हारे साथ ,
अकेले जूझ कर उनसे जीती हो तुम ..
3 उँगलियों को थाम कर
हर रात का सफ़र तय किया है तुमने ..
आज वो 3 हाथ तुम्हें सँभालने को तैयार हैं ...
फिर ये कैसे कहा तुमने ..
और जहाँ तक तुम्हारे ग्रहों का लगना है
तो अपने ग्रह तो हमेशा हमारे साथ रखना ..
तभी तो आने वाले हर अँधेरे को हम
तुम्हारे ग्रहों की रौशनी से चीर पाएंगे ...