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फिर वही शब्दों का विहंगम जाल.......... फिर वही शब्दों का विहंगम जाल..........

शब्दों की भी एक सीमा होती है कहने की भी एक हद होती है... पर हम कहाँ चुकने देते हैं शब्दों को , उसमें रंग भरते रहते हैं , फिर उसे नया अंद...

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11:00 AM

मैं ..... मैं .....

ज़िन्दगी अपनी शर्तों पर होती है जो तुम सोचते हो वह मैं भी मान लूँ - मुमकिन तो नहीं ... तुम भीड़ में सुकून पाते हो मुझे अपने अकेलेपन से प्...

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1:06 PM
 
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