फिर वही शब्दों का विहंगम जाल..........
शब्दों की भी एक सीमा होती है कहने की भी एक हद होती है... पर हम कहाँ चुकने देते हैं शब्दों को , उसमें रंग भरते रहते हैं , फिर उसे नया अंद...
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फिर वही शब्दों का विहंगम जाल..........
शब्दों की भी एक सीमा होती है कहने की भी एक हद होती है... पर हम कहाँ चुकने देते हैं शब्दों को , उसमें रंग भरते रहते हैं , फिर उसे नया अंद...