कुछ नमी कभी नदी कभी गर्भ ... निर्माण का स्रोत कभी मैं कभी तुम ... अंकुरित साँसें टप से गिरी बूंदें ... कहीं आंसू, कहीं ओस , कहीं बीज बन गए .... रश्मि प्रभा =========================================================== आँसू की नदी गिरता हुआ झरना देख पर्वत ने कहा मेरे सीने में भी आँसू की नदी बहती है नदी ने सुन लिया एक धुँध सी उठी पूरा जंगल नम हो गया !! ********* गर्भ में तुम्हारे ! ओंधे मुँह गिरे अम्बर का चकनाचूर बदन, फटी बिवाइयों और सूख चुके फफोलों की अकड़न आ ! ढक दूँ- सफ़ेदझक बादलों के कातर डैनों से आ ! सींचदूँ तुझे समेटकर मेरे रोमछिन्द्रों में बचे कुछ संभावित स्वेदजल से ताकि तुम्हारी देह पा जाए- कुछ नमी मेरी भीगी संवेदनाओं से और ऐसे में संभव ही हो नवजात अंकुरण गर्भ में तुम्हारे ! ******* -- नरेन्द्र व्यासद्वारा बी.डी. व्यास कीकानी व्यास चौक, बीकानेर -(राज.) 334005 http://www.aakharkalash.blogspot.com 09636208300 कुछ नमी कभी नदी कभी गर्भ ... निर्माण का स्रोत कभी मैं कभी तुम ... अंकुरित साँसें टप से गिरी बूंदें ... कहीं आंसू, कहीं ओस , कहीं बीज बन गए .... ... Read more » 11:00 AM