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कुछ नमी कुछ नमी

कभी नदी कभी गर्भ ... निर्माण का स्रोत कभी मैं कभी तुम ... अंकुरित साँसें टप से गिरी बूंदें ... कहीं आंसू, कहीं ओस , कहीं बीज बन गए .... ...

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11:00 AM
 
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