हूक-सी उठती है...
एक बूंद भी आँखों से नहीं निकलता आँखों के समंदर में रेगिस्तान बढ़ता चला जाता है बढ़ता जाता है ...... लहुलुहान अपनी सोच का कतरा कतरा चु...
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हूक-सी उठती है...
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