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प्रतीक्षारत तुलसी प्रतीक्षारत तुलसी

तुम अपनी प्रतीक्षा की बात करते हो तुम्हारे तो पाँव हैं टहल सकते हो दूसरी ठाँव पा सहते हो लेकिन जीवन के असंतुलित भागदौड़ में संस्कारों की ...

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10:22 AM

कविता : धरा, आकाश और वायु कविता : धरा, आकाश और वायु

नामों की गुत्थियों में उलझा मन और तुम तुम खुद में एक पहचान हो  हर नाम से परे ............. रश्मि प्रभा ==============================...

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11:00 AM
 
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