मेरा बचपन
आज कोई साथ नही है गुमसुम सी बैठी हूँ अकेले .. न कोई सुनने वाला है न कोई सुनाने वाला .. साथ है भी तो बस मैं और मेरी बचपन कि वो यादें .. तभी...
🔽विश्व ब्लॉगकोश से जुड़ें और दर्ज कराएं अंतर्जाल पर अपनी सार्थक उपस्थिति
|
देख अब साख ने अपने पत्ते छोड़ दिए है तेरी याद में तुम कब आओगे, ये पतझड़ पूछे है बहार से .............. कोई आस नहीं लगती है ...
जो दिल को सुकून दे वो पल है कहाँ !
चित्र : गूगल से साभार ४० साल पहले जिस खिड़की के सामने बैठकर सुकून मिला करता था आज जब उस खिड़की के सामने बैठी...