उसकी खोज
मोह से मोक्ष की यात्रा कभी प्राप्य कभी अप्राप्य ... रश्मि प्रभा =====================================...
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मेरे हिस्से की मिठास
तुम्हारा आना मैं भूल गई मेरे अन्दर समंदर अपना स्वाद लिए बैठा था अब तो जो है, तुम्हारी मिठास है ... रश्मि प्रभा ====================...
बन्द लिफाफा
ख़्वाबों के चारागाह में धड़कनों में भी एक नदी बहती है सागर से मिलने को बेख़ौफ़ दौडती है ... रश्मि प्रभा ===============================...