सीखा है हमने...
होशियारी सीखी या नहीं अनाड़ी हो कि नहीं ... इससे परे बच्चे बन जाओ मिलजुल रहो , हंसो , मासूम सपने देखो न किसी ध्यान की ज़रूरत हो...
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सीखा है हमने...
होशियारी सीखी या नहीं अनाड़ी हो कि नहीं ... इससे परे बच्चे बन जाओ मिलजुल रहो , हंसो , मासूम सपने देखो न किसी ध्यान की ज़रूरत हो...
मासूम अपराध...
हत्या चोरी झूठ की परिभाषा सब जानते हैं चश्मदीद गवाह बदल जाते हैं पर किसी मासूम की भूख से बेपरवाह सब गुरु बन जाते हैं हैं .... ...