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मन की किरचें मन की किरचें

अन्दर कितना कुछ टूटता है , टूटता जाता है उससे मन हटा के हम खुद को वहम देते हैं - सब ठीक है पर कई रातें अनमनी गुजर जाती है ... रश्मि प्रभ...

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8:52 AM

पहाड़ों की .. रानी पहाड़ों की .. रानी

मैं ख्यालों की एक बूंद सूरज की बाहों में कैद आकाश तक जाती हूँ बादलों के सीने में छुपकर धरती की रगों तक बहती हूँ कभी फूल, कभी वृक्ष में सौन...

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12:11 PM
 
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