ज़ख्म
बन्द हैं चौखट के उस पार अतीत की कोठरी में पलों के रत्न जड़ित आभूषण एक दबी सी आहट सुनाती एक दीर्घ गूंज समय चलता अपनी उलटी चाल घिरता ...
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तेरा एहसास...'मन' मेरे
तुम्हारे बिना मैं कुछ नहीं तुम्हें सोचते हुए मेरी आँखों से ख़्वाबों की बारिश होती है जो सीधे चनाब को जाती है ... रश्मि प्रभा ====...