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बस यही फर्क है ----- बस यही फर्क है -----

सोच का फर्क .... स्थिति को आसान भी बनाता है  और दुरूह भी .... रश्मि प्रभा  ================================================...

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9:38 AM

चहरे पर लिखी इबारतें चहरे पर लिखी इबारतें

चहरे की भाषा पढ़ना तो वक्त शायद सबको ही सिखा देता है लेकिन उसे पढ़ने के लिए कम से कम चहरे का सामने होना तो ज़रूरी है ! लेक...

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12:14 PM

ममता की छाँव ( मातृ दिवस पर विशेष ) ममता की छाँव ( मातृ दिवस पर विशेष )

सृष्टि तुम प्रकृति तुम सौन्दर्य तुम परिवर्तन तुम तुम ही हो विद्या तुम्हीं हो लक्ष्मी और साहसी दुर्गा तुम तुम हो सपना तुम्हीं हक...

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9:48 AM

तुम्हें आना ही होगा तुम्हें आना ही होगा

किन लफ़्ज़ों में कहूँ कृष्ण तुम्हारी कितनी ज़रूरत है कहना सुनना बहुत हुआ .... बस अब इस अधिकार का विश्वास है 'तुम्हें आना होगा ' रश्...

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10:38 AM

आहट आहट

हवा मुझे छूकर गई है कानों में गुनगुना के गई है बांयी आँख फड़की है हिचकी भी आई है .... कहीं यह सब तुम्हारे आने की आहट तो नहीं ! रश्मि प्...

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11:00 AM

ज़रा ठहरो ज़रा ठहरो

मैं खुद एक नज़्म हूँ , जिसे सृष्टिकर्त्ता ने अनमोल शब्दों से सजाया और किताब के पन्नों में रखे गुलाब की तरह संजो दिया .......... कभी फुर्सत हो...

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11:00 AM
 
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