फितरत
मासूमियत और बहेलिया बच्चे और चिड़ा के लिए चिड़िया की प्यार भरी सोच न चिड़िया रही न बच्चे न चिड़ा - !!! रश्मि प्रभा ==============...
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स्वीकार करो
अनुभवों की चाभी अपनी होती है आगत के लिए ख़ास होती है ... रश्मि प्रभा ===============================================...
आखिरी बात अभी कही नहीं है
रह भी गई जो आखिरी बात सूरज को निकलने से कौन रोक सकता है ! रश्मि प्रभा ==============================================================...
परिक्रमा पूरी हुई
खो देने का भय जब प्रबल होता हैतो सागर नाले की शक्ल में जीना चाहता है... पर उसकी उद्दात लहरें उसका स्वाभिमान होती हैं जो किनारे से आगे जाकर अ...
लो यह साल भी गया ... अब फिर है एक नया साल नए संकल्प नई संभावनाएं नए मौके ! यह साल गया इसे जाना ही था पर जब तक यह रहा तुम्हें तुम्हारे संकल्प...
मेरी तलाश मेरी जिजीविषा
कहाँ भटकते रहे मन? तुम्हारे सारे अर्थ तो तुम्हारे ही भीतर थे, जो "कस्तूरी" की तरह, तुम्हारे रोम-रोम में सुवासित थे, तुम्हारी आँखों...
पानी का कैनवस
ईश्वर ने सत्य का स्वरुप हर बार दिखाया है तो फिर उलझन कैसी ? रश्मि प्रभा ================================================================ पान...
कहाँ हूँ मैं !
ईश्वर ने बनाया था तुम्हें आकाश तुमने स्वयं को सीढ़ी में परिवर्तित किया तुम्हें लगा लोग सीढ़ी चढ़कर उस आकाश पर पहुंचेंगे जो तुम बने थे ...!!!...