गाँव से भागता हुआ आदमी - पंकज त्रिवेदी
गाँव से भागता हुआ आदमी जब शहर की ओर भागने लगा था तो सबकुछ पाने की चाह से कितना लाचार और बेबस सा था और है गाँव भी ट...
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गाँव से भागता हुआ आदमी - पंकज त्रिवेदी
गाँव से भागता हुआ आदमी जब शहर की ओर भागने लगा था तो सबकुछ पाने की चाह से कितना लाचार और बेबस सा था और है गाँव भी ट...
वहाँ जहां पर प्यार नहीं हो, कैसे फूल बरसाएं, दुःख के कांटे चुभते हो तो, क्यों कर प्रीत निभाएं ? चोट लगती हर वचन से, नैनों...
...जब गोधरा जल उठा था
गुजरात - 27 फरवरी 2002 "हर रोज की तरह उस सुबह भी मैंने क्रिकेट की ख़बरें पढ़ने के लिए ही अखबार उठाया लेकिन उस सुबह अखबार लाल खू...
तुम्हारी कमी...
आज यूँ ही एक ख्याल गुजरा मेरे रास्ते से, शायद क्यूंकि तुम मेरे साथ नहीं आज! ख्याल ने झाँका मेरे अंतर्मन में पढ़ा मेरी बे...
और तुम आओ!! (कुछ हल्का-फुल्का....)
सूरज की दिशा बदले सूर्यास्त से कलरव का आरम्भ हो सूर्योदय में आँखों में नींद हो कमरे में रोटी सिंके रसोई में खाट बिछे तुम बोलो-...
ये दोबारा कब होगा ????
वो कागज़ की कश्ती वो छप छप पानी वो बेख़ौफ़ लड़ना जिद्द करना कड़ी धूप में चाँदनी को पाना .... क्या ये दिन फिर मिल सकते हैं ! ...
हिंदी दिवस मनाने का भाव अपनी जड़ों को सीचने का भाव है . राष्ट्र भाव से जुड़ने का भाव है . भाव भाषा को अपनाने का भाव है . हिंदी दिवस ...
रहेगीं संवेदनाएँ अगली सदी में भी...
कविता रहेगें हम रहेगें रहेगीं हमारी संवेदनाएँ आस्थाएँ अगली सदी में भी रहेगें हमारे प्रेम हमारी शांति हमारे सारे प्रतिरुप पर छाया ...