स्त्री
माँ है,बहन है,अर्द्धांगिनी है फिर भी ..........प्रश्न क्यूँ है हत्या क्यूँ है हादसे क्यूँ हैं !!! रश्मि प्रभा ======...
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सार........ वह मुझमें ही पा लेना चाहती थी आदि से अन्त तक एक अनादि सृष्टि मैंने बो दिया है उसकी उर्वर भूमि में सारा अपनापन ताकि म...
निकुम्भ का इन्तजार
इस कहानी में एक बच्चे का भय,दर्द सबकुछ है क्या ज़रूरी है कि हर बच्चा एक जैसा हो 'तारे ज़मीं पर' अभिवावक,शिक्षक के लिए ए...
जलनखोर कहीं का.....।
चौखट के उस पार खड़ी ख़ुशी ने फुसफुसा के कहा -------- मैं तो कबसे खड़ी हूँ इंतजार में कि-कब द्वार खुले और मैं अन्दर दा...
कौन कहता है ये इक्कीसवी सदी है..
मैं भाव नहीं हूँ ... चाह की आशा लिए फैला हुआ हाथ हूँ भीख के लिए नहीं संतुलित विनम्र हक के लिए मैं एहसान नहीं एहसान तो तुम...
विक्रम वेताल 9
न विक्रम ने हठ छोड़ा है न बेताल ने कहानी और उससे उत्पन्न प्रश्नों से विक्रम को मुक्त किया है प्रश्न उठ रहे,विक्रम बता रहा सत...
मृत्यु के निकट
संगत से जो गुण जात हैं तो आवत काहे नहीं एक सड़ा सेब सारे सेब सड़ा देता है 99 अच्छे सेब एक सड़े को अच्छा क्यूँ नहीं बनाते ....
" तुम ही हो दामिनी।"
शब्दों के हिंसक प्रयोग से अधिक यह आत्मा का रुदन है आंसू सूख भी गए तो लकीरें काफी हैं इंसानियत को जगाने के लिए ........ ...
राष्ट्रगान
हम क्या थे,हम क्या हो गए इसे उसे दोष देते हुए अपनी ही मंडी में नीलाम हो गए ! देश के लिए बने गीत जब ज़ुबान से निकलते थे देश...
एक ख़त दामिनी के नाम
भगवान् सुनता है दामिनी भी सुनेगी ... रश्मि प्रभा ======================================================...