वटवृक्ष का ऐतिहासिक अंक
हिंदी ब्लागिंग के एक दशक पर केन्द्रित वटवृक्ष का ऐतिहासिक अंक प्रेस से बाहर आने को आतुर है, किन्तु पाठकों की व्यापक मांग को देखते ह...
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वटवृक्ष का ऐतिहासिक अंक
हिंदी ब्लागिंग के एक दशक पर केन्द्रित वटवृक्ष का ऐतिहासिक अंक प्रेस से बाहर आने को आतुर है, किन्तु पाठकों की व्यापक मांग को देखते ह...
डॉ. अनीता कपूर की तीन कविताएं
नया आकाश उस दिन काँच के बिखरे हुए टुकड़ों में जब झाँका तो पाया स्वयं का ही प्रतिबिंब बिखरा-बिखरा था अस्तित्व फिर उस दिन खं...
मै किससे प्यार करूँ ?
मै किससे प्यार करू हे ईश्वर नफरत किसको दूँ ? सब प्यार मे घोले विष बैठे मै विष मे नेह घोलूं !! पलकों पे जिसको भी रक्खो , वो चेहरे पे...
मेरी कामना
आँखों में सपने लिए दिल के अरमानों से कुछ लफ़्ज़ों को कागज पर उतार दिया पर सम्पादक महोदय ने इन्कार कर मुझको फटकार दिया इसलिए मैं च...
और खाने की गुंजाइश नहीं रही
लघु कथा " भाई , कभी हमारी घर भी आओ न ? " आनंद ने कहा . " कहो , कब आऊँ ? पुरुषोत्तम ने पूछा . " कल ही आ जाओ ...
बेटियों को नीलामी पर चढाने को अभिशप्त है यह मां
वह लड़कियां बेचने-ख़रीदने का काम नहीं करती. वह तो बस मां है आदि से अंत तक मां बस एक मां ! खुले बाज़ार में अपनी चार-चार बेटियों को ...
बेहतर कौन ?
एक शीर्षक : कविता दो : बेहतर कौन ? पहली कविता ओह ! ना जाने कितने अर्थ समेट लेता है खुद मे कभी दुख क्षोभ को तो कभी आश्चर्य को व्...
सपनों में ही पेंग बढ़ाते, झूला झूलें सावन में। मेघ-मल्हारों के गानें भी, हमने भूलें सावन में।। मँहगाई की मार पड़ी है, घी और तेल हुए ...
किरणों ने अवशोषण कर नीर समुद्र का सजाया है श्वेत - श्याम श्रृंगार नभ का विरह अगन धधकाने आ गयी बदरिया दूत बन जाओ मेघ बड़ी लम्बी है डगरिया ...