पुरानी कमीज
प्यार कहाँ नहीं अपने हस्ताक्षर करता है... ग्लास में , चाय से उठते धुंए में हथेली में ...... हस्ताक्षर तो अपने भीतर का प्यार है बस एक बहाना च...
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पुरानी कमीज
प्यार कहाँ नहीं अपने हस्ताक्षर करता है... ग्लास में , चाय से उठते धुंए में हथेली में ...... हस्ताक्षर तो अपने भीतर का प्यार है बस एक बहाना च...
उलझन-उलझन ज़िंदगी …
ज़िन्दगी हर बार उलझती है धागों सी सुलझाने में हम अक्सर सारे धागों को टूटने से बचाना चाहते हैं जो मुमकिन नहीं होता और उलझनें विकराल रूप लेती ...
उलझन-उलझन ज़िंदगी …
ज़िन्दगी हर बार उलझती है धागों सी सुलझाने में हम अक्सर सारे धागों को टूटने से बचाना चाहते हैं जो मुमकिन नहीं होता और उलझनें विकराल रूप लेती...
रिश्तों के नाम
कौन जीता है किसी और की खातिर | सबको अपनी ही बात पर रोना आया | बूढी आँखों में न जाने किसका इंतजार हैं खुद को सँभालने की एक नाकाम कोशिश गाल...
फिर परिंदा चला उड़ान पे है
चुनो अपनी राहें फकत मुकद्दर पर जिन्दा रहना , निकम्मापन और बुझदिली है !अमन की दुनियां मै मेहनत करके , अपना हिस्सा वसूल करलो तुम !उजड़ जायेग...
तवायफ़ की इक रात ....
कितनी तिरस्कृत हूँ मैं और ग्रन्थ को परे रख तुम कितने सात्विक !.... फर्क इतना रहा तुम मुझे अलग करते गए और खुद को जोड़ते गए ! रश्मि प्रभा ...
चिकनी मिट्टी और रेत
मिटटी से जुडी है हमारी असीम भावनाएं और रेत हमें जिंदगी जीने का सबब बताती है दोनों जुडी है भीतर तक हमारे अंतस्थल में रश्मि प्रभा ...
कैसे कर लेते हो?
चित भी तुम्हारी पट भी तुम्हारी हर बाज़ी अपने हाथ कैसे कर लेते हो माहौल को गमगीन तुम बनाते हो नाराज़ भी तुम .......... कैसे ? रश्मि प्रभा...
मौन ....स्वयं एक जवाब !
मौन के तरकश में मर्यादाओं के बाण अधिक असरदार होते हैं एक अलग पहचान रखते हैं .... रश्मि प्रभा ===================================...
एक इतिहास
लुप्त प्रायः हिंदी साहित्य में प्राण संचार करते हुए परिकल्पना समूह के महारथियों ने 30 अप्रैल 2011 को दिगम्बर मार्ग स्थित हिंदी भवन में एक इत...