पकड़ लो हाथ जो एक पल के लिए
मैं तराशी जाऊँगी
........ अपनी निगाहों में
अनमोल हो जाऊँगी



रश्मि प्रभा


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मैं कुंदन हो जाउंगी

एक दिन पूरा तप जाउंगी
सच मैं कुंदन हो जाउंगी
जिस दिन तुमसे छू जाउंगी
हाँ मैं चन्दन हो जाउंगी
मीठे तुम और तीखी मैं
तुम पूरे और रीती मैं
तुम्हे लपेटूं जिसदिन तन पर
मन से रेशम हो जाउंगी
नेह को तरसी नेह की प्यासी
साथ तुम्हारा दूर उदासी
फैला दो ना बाहें अपनी
सच मैं धड़कन हो जाउंगी
मंथर जीवन राह कठिन है
इन बातों की थाह कठिन है
तुम जो भर दो किरणे अपनी
सच मैं पूनम हो जाउंगी...

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सोनल रस्तोगी

21 comments:

  1. वाह ...बहुत खूब ।

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  2. सुन्दर समर्पित भाव!!

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  3. अच्छी कविता... सोनल जी की रचनाएँ सदैव ही प्रभावित करती हैं...

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  4. सुन्दर भाव ! बेहतरीन कविता !

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  5. बहुत सुंदर भाव लिए बहुत ही सुंदर प्रस्तुति /बधाई आपको /मेरे ब्लॉग पर आप-का स्वागत है /जरुर पधारें /





    www.prernaargal.blogspot .com

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  6. देर किस बात की है...वह तो अपने हिस्से का काम कर चुका...सुंदर रचना!

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  7. सुन्दर भाव ! बेहतरीन काव्य !

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  8. वाह बहुत सुंदर भावनात्मक प्रस्तुति...

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  9. धन्यवाद ! मेरी रचना को और मुझे इतना स्नेह देने के लिए

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  10. अच्छी रचना है।
    बहुत सुंदर

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  11. बहुत प्यारी रचना.

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  12. वाह बहुत सुन्दर भाव्।

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  13. kya likhun ki ye lage ki mujhae ye kavita bahut zyada achhi lagi...sirf ye nahi likhna chah rahi ki rachna sunder hai,ya komal hai,ye sunder bhav hain....wo to hain hi...magar mei ye jitni khubsurat lagi, uske liye shabd nahi mil rahe....

    मीठे तुम और तीखी मैं
    तुम पूरे और रीती मैं
    ye line badi sunder ban padi hai
    or ye bhi

    मंथर जीवन राह कठिन है
    इन बातों की थाह कठिन है
    तुम जो भर दो किरणे अपनी
    सच मैं पूनम हो जाउंगी...
    actually to poori rachana hi bahut sunder likhi hai..or ye kam hota hai...

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  14. सुंदर!
    घुघूतीबासूती

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  15. रश्मि जी नमस्कार्। सुन्दर भाव -मै चन्दन-----

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  16. बहुत ही खुबसूरत अभिवयक्ति......

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  17. सुंदर रचना..!!!

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