जब दिल को सताए गम , तो छेड़ सखी सरगम ...."
सरगम की धुन से न जाने कितने नाम निकले हैं , जिनकी आवाज़ मंत्रमुग्ध कर जाती है ,
ऐसी ही एक शक्सियत का नाम है कुहू गुप्ता ,आगरा में जन्मी इस गायिका की आवाज़ में एक गजब की कशिश है और व्यवहार में
सादगी भरी मासूमियत !
जी हाँ ये वही कुहू गुप्ता हैं , जो २००३ और ०४ में 'सारेगामा' के मंच पर आई थीं और अपनी मधुर आवाज़ से सबका मन मोह लिया था .....तो चलिए इस मधुर आवाज़ के बारे में हम उनसे ही कुछ जानते हैं ...
१. कुहू जी, नमस्कार ......
कुहू-नमस्कार
२. संगीत का आकर्षण
कब हुआ ?
कुहू- याद नहीं आता संगीत का आकर्षण कब से हुआ. शायद इसलिए क्योंकि रगों में ही संगीत बसा हुआ है.
जब से होश सम्भाला, तब से खुद को गुनगुनाते पाया. माता पिता को कहते सुना कि तुम बचपन से टेप रेकोर्डर
पर गाने rewind कर कर के सुनती और गाती रहती थी.
3. विधिवत संगीत की शिक्षा आपने किनसे ली ?
कुहू- संगीत की विधिवत शिक्षा मैंने जबलपुर, मध्य प्रदेश में श्रीमती शोभा भट्ट और श्रीमती अरुणा परांजपे से
चार साल तक ली. उसके बाद स्कूल कॉलेज में व्यस्त हो गयी. हाल ही में पुणे में मैंने श्रीमती सुधा पटवर्धन से कुछ
महीनो तक शिक्षा ली थी.
४. घर का माहौल , अपनों का साथ किसी मंजिल की प्राप्ति में सबसे पहले आता है , आपकी इस रूचि में उनका क्या योगदान रहा ?
कुहू- मेरे माता, पिता, भाई, पति और सास ससुर और मेरे करीबी मित्रों ने मेरी प्रतिभा को पहचानते हुए मुझे भरपूर और
नित्य प्रोत्साहन दिया है. मैं दिल से इन सब की शुक्रगुजार हूँ और अपनी सफलता का श्रेय उन सबको देना चाहूंगी.
५.आप नौकरी करती हैं ?
कुहू- जी हाँ. मैंने computer science engineering में IIT बॉम्बे से post graduation करी है और पिछले ४.५ वर्षों से
पुणे में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सीनिअर सोफ्टवेयर इंजिनियर के रूप में कार्यरत हूँ.
६. नौकरी करते हुए क्या अपने संगीत के साथ न्याय कर पाती हैं ?
कुहू- शुरू में नहीं कर पाती थी पर जैसे जैसे समय बीतता गया, मैं किसी तरह समय निकालने में सक्षम रही. और अब मैं बड़े
ही नियमित रूप से संगीत में कुछ न कुछ करती रहती हूँ. फिर चाहे वो गाने रिकॉर्ड करना हो या स्टेज शो देना हो या कभी
कभार कुछ गाने संगीतबद्ध करना हो या फिर संगीत लिखना हो.
७. संगीत को तराशने के लिए निरंतर अभ्यास की ज़रूरत होती है, तो आप निष्ठा से यह न्याय कर पाती हैं ?
कुहू- ये नहीं कहूँगी की मैं पूरी निष्ठा से न्याय कर पाती हूँ क्योकि संगीत में जितना सीखा जाए कम है. पर हाँ
मेरे हाथों में जो समय है, उसका मैं संगीत के लिए भरपूर उपयोग करती हूँ. ये भी सही है कि अगर मुझे २४ घंटे भी मिल
जाएँ, वो भी एक दिन कम ही लगने लगेंगे इस संगीत के सागर का मंथन करने के लिए !
८. इस क्षेत्र में आपने किसे अपना प्रेरणा स्रोत माना ?
कुहू- लता जी की मधुर आवाज़ मेरे दिल को हर पल छूती रही और मधुरता फैलाने की प्रेरणा दी. आशा जी की कशिश
भरी गायकी ने मुझे हर पल गाने में अभिव्यक्ति डालने की प्रेरणा दी. सोनू निगम के बहुमुखी गीत मुझे हमेशा कुछ नयी
शैली के गीतों को गाने की प्रेरणा देते रहे. बाकी और भी बहुत से गायक, संगीतकार और गीतकार हैं जिनकी मैं प्रशंसक हूँ.
८. फिल्म के गीतों से अलग आपने क्या-क्या गाया है , किनके लिखे गीतों से आप प्रभावित हैं?क्या उन पर कुछ प्रकाश डालेंगी ?
कुहू- मैंने बहुत सी मूल रचनाएँ गाई हैं. इन्टरनेट पर ही बहुत से संगीतकारों और गीतकारों से प
रिचय हुआ और बिना मिले
हुए भी हम सबने बहुत से गाने तैयार किये हैं. मेरी एल्बम "कुहू कुहू बोले कोयलिया" जो इन्टरनेट म्यूजिक स्टोर्स में उपलब्ध है,
उसके सभी गाने इन्टरनेट सहयोग से ही बने हैं. कुछ गीतकार जिनके लिखे गीतों से मैं प्रभावित हुई हूँ वो हैं रश्मि प्रभा, सजीव
सारथी और विश्व दीपक.
९. एक निश्चित मुकाम तक पहुँचने के लिए अपना प्रयास अर्थ रखता है या किसी तथाकथित godfather का या एक क्लिक दर्शकों की पसंद का ?
कुहू- निश्चित मुकाम तक पहुँचने के लिए अपनी निष्ठा और प्रयास से बढ़ कर और कुछ नहीं है. और ये इस प्रयास करने की
यात्रा का ही हिस्सा है दर्शकों को आपकी कला का पसंद आ जाना और जिससे आपको एक और
ऊंचा मुकाम हासिल हो जाता है.
१०. आजकल संगीत का जो स्तर है, उसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगी?
कुहू- जहां तक मेरी समझ है, संगीत का स्तर हर समय लगभग एक सा रहता है. हमेशा हर किस्म का संगीत बनता है.
बस फर्क ये है की इस बाढ़ में कौन ज्यादा मार्केटिंग कर ज्यादा लोगों तक अपना संगीत पहुचा कर उसे तथाकथित हिट
बना सकता है. जो लोग ग़ज़ल को पहले सुनते थे वो आज भी सुनते हैं, उन्हें उसके लिए किसी प्रचार या विज्ञापन की ज़रूरत
नहीं. लेकिन युवा पीढ़ी को हर किस्म के संगीत से अवगत कराना और फिर उन्हें खुद अपनी पसंद चुनने का मौक़ा देना बहुत
ज़रूरी है.
११. उभरते कलाकारों के लिए कुछ विशेष , जो आपके मन में अक्सर आता हो ...
कुहू- ये मानते हुए कि मैं खुद एक उभरती हुई कलाकार हूँ, मैं सभी से यही कहना चाहूंगी जैसा ३ idiots में आमिर खान
ने कहा था,' तुम सफलता के पीछे मत भागो. बस अपनी कला में निपुण बनने के मार्ग पर चलते रहो, सफलता खुद तुम्हारे
कदम चूमेगी. और जीवन में कभी भी कुछ नया सीखना मत छोड़ो.'
१२. गाने के अलावा क्या आप गाने रचने और लिखने में भी रूचि रखती हैं ?
कुहू- जी बिलकुल. मैंने गणेश मन्त्रों को स्वरबद्ध किया है जो मेरी एल्बम का हिस्सा भी है. हाल ही में मैंने एक गाने के लिए
शब्द भी लिखे हैं. मेरी तमन्ना है कि एक दिन मैं एक गाना पूरी तरह से बनाऊँ, यानी कि स्वर रचना, शब्द और गायकी तीनो :)
१३. आखिर में चलते चलते आपकी पसंद के गायकों और गीतकारों के बारे में आपसे सुनना चाहूँगी ...
कुहू- वे सभी मेरी प्रेरणा हैं जिनका मैंने ऊपर ज़िक्र किया. हर बार सुनने पर कुछ अलग सीखने को मिलता है.
कुहू जी , विदा लेती हूँ , विदा लेने से पूर्व आपको बता दूँ , आपकी आवाज़ का नशा ऐसा है कि मेरी दिनचर्या में आपका एक गीत
अवश्य शामिल होता है,...........
मेरी शुभकामना है कि आपकी आवाज़ एक दिन देश
के हर कोने में अपना मुकाम बनाये ...
कुहू- शुक्रिया रश्मि जी ....
आपका भी बहुत बहुत शुक्रिया इस महत्वपूर्ण समय के लिए
रश्मि प्रभा
वटवृक्ष की यह नई खोज कविता, कहानी, लेख के बाद आज साक्षात्कार प्रस्तुति तो बहुत ही सुन्दर लगी रश्मि दी आप यह नये-नये विचार नये लोगों से मिलाना ...कैसे सोच लेती हैं यह सब, फिर भी आपका यह प्रयास बहुत ही सार्थक है ब्लाग जगत के लिये कुहू जी का साक्षात्कार बहुत ही अच्छा व रूचिकर उनकी खूबिया से रूबरू कराने के लिये आभार ...।
ReplyDeleteकुहू जी के बारे मे जानकर बहुत अच्छा लगा……………आपका आभार्।
ReplyDeleteजहां तक मैंने महसूस किया है कि वटवृक्ष एक ऐसी स्तरीय पत्रिका का स्वरुप ग्रहण करती जा रही, जिसमें प्रकाशित होना हर रचनाकार के लिए एक गर्व का विषय होगा ...!
ReplyDeleteआज पहली बार इस ब्लॉग पर आया, तो देखा कि हमारे आदर्श ब्लोगर रवीन्द्र प्रभात जी की उपस्थिति है यहाँ और वरिष्ठ कवियित्री आदरणीया रश्मि जी का कुशल संपादन ,
नए-पुराने रचनाकारों से सजा कर इस गुलदस्ते को एक नया आयाम देने हेतु रश्मि जी प्रशंसनीय हैं , साधुवाद !
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ReplyDeleteरश्मि जी ,
ReplyDeleteआपकी यह वटवृक्ष पत्रिका नए आयाम छुएगी ..ऐसी मुझे आशा है ...आपन इसमें हर विधा को संजोया है ....
बहुत सुन्दर साक्षात्कार ..कुहू जी से परिचय अच्छा लगा
संगीता जी,मनोज जी ... इसका श्रेय उन उच्च रचनाकारों को जाता है, जो इस वटवृक्ष के नीचे अपनी-अपनी सुनाते हैं ...मैं तो समय हूँ ,जो आपसबों को सुन रहा है, सुना रहा है ...
ReplyDeleteकुहू जी से मिलकर बहुत अच्छा लगा ... आपको धन्यवाद जो आपने संगीत की दुनिया से इस उभरती कलाकार को सामने लायी और हम सबसे मुलाकात करवाई ..
ReplyDeleteकुहू जी को बहुत सारी शुभकामनायें !
अरे वाह रश्मि दि ..एक प्रखर इंसान और उम्दा गायिका से यहाँ परिचय कराने का बहुत बहुत धन्यवाद .आप लोग जितनी मेहनत इस पत्रिका के लिए कर रहे हैं जरुर इन्द्रधनुषी रंग लेकर आएगी.
ReplyDeletereally happy to read the interview of Kuhu ma'm..
ReplyDeleteI remember watching her on saregama and meeting her personally was a beautiful thing..
kuhuji ke bare me jankari bahut rochakta se di gayee.....bahut badiya ....
ReplyDeletesundar interview.
ReplyDeleteकुहू जी,
वैसे रश्मि जी ने आपसे बहुत हीं अच्छे सवाल किए हैं और आपने उसी सुंदरता से उनका जवाब दिया है। तैयार रहिए, अगली बारी मेरी है ;)
ReplyDeleteमुझे भी आपका इंटरव्यु ले लेना चाहिए था, जिस दिन मैं आपसे मिला था.. खैर कोई नहीं, अगली बार
धन्यवाद,
विश्व दीपक
bahut achchi prastuti hai.
ReplyDeleterashmiji
ReplyDeleteaik vtvrksh kitno ko hi chanv deta hai ,thanv deta hai apne apni bhumukhi pratibha se sabit kar diya .|
itne khubsurt sakshatkar ke liye kuhuji aur apko badhai .
shubhkamnaye
मैं दोनों ही हस्तियों को जानती हूँ... एक गुरु सामान और एक सहपाठिनी... परन्तु आज दोनों को साथ देखकर बहुत ही अच्छा लगा... शुक्रिया आप दोनों को...
ReplyDeleteआपके शब्दों के माध्यम से कुहू से मिलना अच्छा लगा ...
ReplyDeleteGood one
ReplyDeleteMay you reach pinnacle of glory in this field you have chosen.. May God bless you always and our best wishes with you:)
ReplyDeleteLove
Shruti Kognolkar
Good to know About great singer Kuhoo. Thanks
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