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जब तक सच नवाबों की तरह नफासत में
अपने पैरों में जूते डालता है
झूठ दुनिया की सैर कर आ जाता है ...


रश्मि प्रभा


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मैंने झूठ के पैर देखे है...


मैंने झूठ के पैर देखे है
सत्य के नकाब में
चलते देखा है झूठ को दौड़ते देखा है।
खुदा की बेकुसूरी पर
मस्जिदों की दीवारों को
फकीरों ने सिसकते देखा है।
मैंने साँझ के वक़्त
कसमों की फटी चादर में
बुढ़िया को ठण्ड से ठिठुरते देखा है।
पुजारीओं की प्रार्थनाओं में
My Photoलोगों की खुशहाली को
बेबस कुचलते देखा है ।
मैंने झूठ के पैर देखे है
सत्य के नकाब में
चलते देखा है झूठ को दौड़ते देखा है....।



हरीश जयपाल माली
http://harishjaipalmali.blogspot.com/

8 comments:

  1. जब तक सच नवाबों की तरह नफासत में
    अपने पैरों में जूते डालता है
    झूठ दुनिया की सैर कर आ जाता है ...
    वाह ...बहुत खूब कहा है ...बेहतरीन प्रस्‍तुति के लिए आभार ।

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  2. aaj maine jhooth ke pair pahli baar dekhe.sundar rachana accha laga padhkar

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  3. सार्थक, बेहतरीन प्रस्‍तुति.

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  4. वाह क्या बात कही है...
    रश्मि जी you are too good :-)

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  5. झूठ के पाँव नहीं होते...आप भाग्यशाली हैं...जो उसे ताड़ लिया...

    ReplyDelete

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