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दर्द का सैलाब जब आया
मैं कतरा कतरा डूबती गई
तिनकों के सहारे उबरने के क्रम में
मेरे संग तिनके भी घुटने लगे
कभी मैं उतराती
कभी तिनके
फिर हम तैरने लगे
दर्द की नदी को भी हंसाने लगे

रश्मि प्रभा



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नीड़ का निर्माण होगा।
अगन लपट से बुझे तीर ने
मानवता को बींध दिया
निशा का साम्राज्य सबल है
शैतानी ने नाच किया
फिर फिर कंस ने जन्म लिया
फिर रावण ने उत्पात किया
मनुष्यता को दांव पर रख
इश्वर को ललकार दिया?
क्या नाश के दुःख से
कभी निर्माण रुकता है ?
“नव पलाश पलाश वनं पुरं
स्फुट पराग परागत पंकजम”
सुबह का आह्वान होगा
नीड़ का निर्माण होगा
प्रलय की निस्तब्धता में
कंस का विनाश होगा
नेह का आव्हान होगा
सृष्टि में नवगान होगा
फिर नीड का निर्माण होगा’
नेह का आव्हान फिर फिर, नीड का निर्माण फिर फिर”
--
aroma




साभार,
शारदा मोंगा .
sharda.monga@gmail.com

19 comments:

  1. बहुत ही सकारात्मक सोच लिए एक बेहतरीन रचना....

    शारदा जी से मिलवाने के लिए धनयवाद...

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  2. नेह का आव्हान फिर फिर, नीड का निर्माण फिर फिर”.... बहुत ही सकारात्मक सोच !

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  3. एक बेहतरीन सकारात्मक रचना....

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  4. बखूबी समस्याओं से अवगत कराया पर उम्मीद से भी बढ़िया अंत निकला . बेहतरीन परिकल्पना

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  5. नेह का आव्हान होगा
    सृष्टि में नवगान होगा
    फिर नीड का निर्माण होगा’
    “नेह का आव्हान फिर फिर, नीड का निर्माण फिर फिर”


    ek behtareen rachna ke liye badhai...:)

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  6. कंस का विनाश होगा
    aashaavaadi rachna
    bahut khub

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  7. सृष्टि में नवगान होगा
    फिर नीड का निर्माण होगा’
    “नेह का आव्हान फिर फिर, नीड का निर्माण फिर फिर”
    रश्मि जी,
    परिक्रमा में सहेजे गए गीतों ने मन को मोह लिया.

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  8. एक बेहतरीन सकारात्मक रचना....

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  9. सकारात्मक सोच !

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  10. बहुत अच्छी रचना लगी.

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  11. बहुत ही सकारात्मक सोच !

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  12. ek saarthak soch, bahut achhi rachna, shubhkaamnaayen.

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  13. यकीनन नीड़ का निर्माण फिर होगा

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  14. बहुत सुन्दर और सार्थक रचना ...

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  15. बेहद सकारात्मक भाव से ओत-प्रोत है दोनों ही रचना!

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  16. नेह का आव्हान होगा
    सृष्टि में नवगान होगा
    फिर नीड का निर्माण होगा’
    “नेह का आव्हान फिर फिर, नीड का निर्माण फिर फिर”

    आशान्वित भावों का संयोजन रचना को और अधिक सौन्दर्य प्रदान कर रहा!

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