कहीं तो होगी मधुशाला 
बूंद बूंद में जीवन हाला ....


रश्मि प्रभा 
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१)
जीवन असमंजस का प्याला,
तम-प्रकाश की मिश्रित हाला.
सबल विवेक, निर्बल विकार हों 
आशाएं मेरी मधुशाला!

२)
ओ छल-साकी मत पिला अब
इतना कि होऊं मतवाला.
सुध-बुध की है यहाँ चौकडी,
अंतर्मन है मधुशाला!

३)
नयना मेरे मधुघट हैं और
चिर उमंग चांदी सा प्याला.
गरिमा की हाला प्रबोधिनी,
स्वर्णलता सी मधुशाला!


४)
रुकते-रुकते चल पड़े मन,
ऐसी आशाओं की हाला.
और चलके रुक जाए जहाँ पर
वहीँ-वहीँ हो मधुशाला

[12.JPG]

मधुरेश 
http://madhushaalaa-sumit.blogspot.in/

2 comments:

  1. बेहतर लेखन !!

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  2. उचित चयन |

    सादर

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